भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रुपये के अवमूल्यन का आकलन 

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था 

संदर्भ

  • भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने कहा है कि भारतीय रुपया नाममात्र प्रभावी विनिमय दर तथा वास्तविक प्रभावी विनिमय दर दोनों के संदर्भ में अवमूल्यित है।

परिचय

  • भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने स्पष्ट किया कि बैंक किसी विशिष्ट विनिमय दर को लक्ष्य नहीं बनाता।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में केवल अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने तथा व्यवस्थित बाजार परिस्थितियाँ बनाए रखने के उद्देश्य से हस्तक्षेप करता है।

मुद्रा का अवमूल्यन

  • किसी मुद्रा को अवमूल्यित तब माना जाता है, जब उसकी बाजार विनिमय दर उस स्तर से कम हो, जिसे किसी देश की मूलभूत आर्थिक स्थितियाँ उचित ठहराती हों।
  • दूसरे शब्दों में, जब किसी मुद्रा का विनिमय मूल्य उस स्तर से कम हो, जिसका संकेत आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति, उत्पादकता, बाह्य क्षेत्र की स्थिरता, विदेशी मुद्रा भंडार तथा निवेशकों के विश्वास जैसे कारक सामान्यतः देते हैं, तब उसे अवमूल्यित माना जाता है।
  • जब अस्थायी बाह्य आघातों के कारण किसी मुद्रा का मूल्य उसके संतुलन स्तर से अधिक गिर जाता है, तब अर्थशास्त्री सामान्यतः उसे अवमूल्यित मुद्रा के रूप में वर्णित करते हैं।

रुपये के मूल्यह्रास के कारण

  • वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत का आयात व्यय बढ़ता है।
    • इससे अमेरिकी डॉलर की माँग बढ़ती है, जिसके परिणामस्वरूप रुपये पर अवमूल्यन का दबाव उत्पन्न होता है।
  • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष: पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता उत्पन्न करते हैं।
    • ये ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करते हैं तथा रुपये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
  • अमेरिकी डॉलर का सुदृढ़ीकरण: डॉलर परिसंपत्तियों की वैश्विक माँग तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में सख्त मौद्रिक नीति की अपेक्षाओं के कारण अमेरिकी डॉलर सुदृढ़ होता है।
    • इससे अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपये का सापेक्ष मूल्य कम हो जाता है।
  • वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति में वृद्धि: वैश्विक अनिश्चितता के समय निवेशक अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों को प्राथमिकता देते हैं।
    • इससे उभरते बाजारों से पूँजी का बहिर्गमन होता है तथा उनकी मुद्राएँ कमजोर होती हैं।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा पूँजी निकासी: भारतीय शेयर एवं ऋण बाजारों से विदेशी निवेश की निकासी के कारण निवेशक अपने रुपये को विदेशी मुद्रा में परिवर्तित करते हैं।
    • इससे डॉलर की माँग बढ़ती है तथा रुपये के मूल्य में गिरावट आती है।

अवमूल्यित रुपये से संबंधित चुनौतियाँ

  • आयात महँगा हो जाता है, जिससे देश का आयात व्यय बढ़ता है।
  • कच्चे तेल की ऊँची कीमतों के कारण आयातित मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है।
  • आयातित कच्चे माल पर निर्भर उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है।
  • विदेशी मुद्रा में लिए गए बाह्य ऋणों का भुगतान अधिक महँगा हो जाता है।
  • यदि रुपये का लगातार मूल्यह्रास संरचनात्मक कमजोरियों के कारण हो, तो इससे निवेशकों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

कमजोर रुपये के लाभ

  • कमजोर रुपया भारतीय निर्यात को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।
  • निर्यातकों को रुपये के रूप में अधिक आय प्राप्त होती है।
  • घरेलू उद्योगों को निर्यात माँग में वृद्धि का लाभ मिल सकता है।

नाममात्र प्रभावी विनिमय दर

  • नाममात्र प्रभावी विनिमय दर भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की मुद्राओं के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य का भारित औसत सूचकांक है।
  • यह विभिन्न मुद्राओं के समूह के सापेक्ष रुपये के उतार-चढ़ाव को मापती है।
  • वर्तमान में भारतीय रिज़र्व बैंक 40 मुद्राओं के समूह के आधार पर नाममात्र प्रभावी विनिमय दर की गणना करता है, जो भारत के कुल वस्तु व्यापार का लगभग 88 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती हैं।
  • इसका आधार वर्ष 2015–16 है तथा सूचकांक का आधार मान 100 निर्धारित किया गया है।
  • प्रत्येक मुद्रा का भार संबंधित देश की भारत के विदेशी व्यापार में हिस्सेदारी के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
  • हालांकि, नाममात्र प्रभावी विनिमय दर विभिन्न देशों के बीच मुद्रास्फीति के अंतर को ध्यान में नहीं रखती।

वास्तविक प्रभावी विनिमय दर

  • वास्तविक प्रभावी विनिमय दर नाममात्र प्रभावी विनिमय दर का मुद्रास्फीति-समायोजित रूप है।
  • यह विभिन्न देशों में मुद्रास्फीति के अंतर को समायोजित करने के बाद भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की मुद्राओं के मुकाबले रुपये के मूल्य को मापती है।
  • वास्तविक प्रभावी विनिमय दर को किसी देश की बाह्य प्रतिस्पर्धात्मकता का सबसे विश्वसनीय संकेतक माना जाता है।

स्रोत: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/शासन संदर्भ 2 अगस्त से यूरोपीय संघ ने ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित सामग्री पर अनिवार्य लेबल लगाने का प्रावधान लागू किया है। परिचय उद्देश्य: पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा मानव उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन परिवर्तित अथवा कृत्रिम रूप से निर्मित सामग्री की पहचान करने में सक्षम बनाना। यह प्रावधान यूरोपीय...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण संदर्भ उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन को निरस्त कर दिया, जिसके माध्यम से आधारभूत संरचना परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान करने की अनुमति दी गई थी। परिचय वर्ष 2021 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार उन परियोजनाओं को पूर्वव्यापी स्वीकृति प्रदान की जा सकती थी, जिन्होंने पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; कल्याणकारी योजनाएँ संदर्भ प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक समान एवं समावेशी पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छात्रों को बिना संपार्श्विक (गिरवी) तथा बिना जमानत शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ ब्याज सहायता भी प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना यह नवंबर 2024 में अनुमोदित केंद्र सरकार की एक योजना...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ हाल ही में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने बीमा उद्योग के आधुनिकीकरण, सुशासन को सुदृढ़ करने, पॉलिसीधारकों के संरक्षण को सशक्त बनाने तथा बीमा के प्रसार में तीव्रता लाने के उद्देश्य से अनेक सुधारों को अनुमोदित किया है। ये सुधार ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025’ के...
Read More

पाठ्यक्रम:GS3/रक्षा संदर्भ भारत थिएटरकरण (एकीकृत थिएटर कमान व्यवस्था) की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के निकट है, जिसके अंतर्गत थल सेना, नौसेना तथा वायु सेना को संयुक्त थिएटर कमानों के अधीन संगठित किया जाएगा। थिएटरकरण (एकीकृत थिएटर कमान व्यवस्था) थिएटरकरण से अभिप्राय थल सेना, वायु सेना तथा नौसेना की कमान संरचनाओं का एकीकरण करना है,...
Read More

रूस के व्यापारिक साझेदारों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने संबंधी विधेयक को संयुक्त राज्य अमेरिका में त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस एवं ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026’ को त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया के अंतर्गत आगे बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया है।...
Read More
scroll to top